आज तक के एंकर के सवाल पर भड़के स्वामी प्रसाद मौर्य, कहा: ‘आप भाजपा नेताओं की भाषा बोल रहे…’

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़ते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने यूपी के कैबिनेट मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया।

मामले को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य का कहना था कि भाजपा पिछड़ों की ओर ध्यान नहीं दे रही थी। इस सिलसिले में उन्होंने आजतक को भी इंटरव्यू दिया। हालांकि बेटे को टिकट न देने के सवाल पर स्वामी प्रसाद मौर्य न्यूज एंकर पर ही बिफर पड़े और भाजपा नेताओं का नाम लेकर उन्हें खरी-खोटी सुनाने लगे।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी के बयान को याद करते हुए पार्टी छोड़ने का कारण बताया और कहा, “मोदी जी ने बयान दिया था कि लोग मुझे नीच इसलिए कहते हैं, क्योंकि मैं पिछड़ा हूं। मैंने सोचा कि जब मोदी जी जैसा बड़ा नेता पिछड़ों की दुहाई दे रहा है तो उनके मन में पिछड़ों के लिए दर्द होगा। उनकी दुहाई के नाते ही मैं भाजपा में आया था।”

स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “मुझे लगा कि भाजपा की नीयत और चेहरा बदल गया होगा। लेकिन यहां पता चला कि उनका चेहरा जरूर बदल गया, लेकिन नीयत वही है। दलितों, पिछड़ों या देश की जनता के हित के खिलाफ जब भी कोई फैसला आया, मैंने अपनी बात रखी। समय-समय पर नेतृत्व को भी याद दिलाया। लेकिन उसपर तवज्जो न दिये जाने के नाते मैं उस अपमान के घूंट को पीता रहा।”

स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने बयान में आगे कहा, “लेकिन आज जब उचित अवसर आया, निर्वाचन आयोग ने तिथियों की घोषणा की तो मैंने सोचा कि भाजपा के कुशासन का शिकार जो जनता को होना पड़ा, उन्हें आगे ऐसा न सहना पड़े। हम इस्तीफा देकर जनता को सावधान कर दें और भाजपा की विदाई का रास्ता भी साफ कर दें।”

वामी प्रसाद मौर्य की बात पर न्यूज एंकर ने कहा, “भाजपा नेताओं का कहना है कि बेटे को टिकट न मिलने पर आपने पार्टी छोड़ी। क्या आपको अपने परिवार को टिकट दिलानी थी, जो कि भाजपा नहीं दे रही थी। क्योंकि वहां इतने सारों को टिकट नहीं मिल सकती। वजह क्या रही?” उनकी बात पर पूर्व भाजपा नेता ने कहा, “ये तो आप भाजपा नेताओं की भाषा बोल रहे हैं।”

स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने जवाब में आगे कहा, “जिसके पीछे लाखों लोगों का हुजूम खड़ा हो, उसके लिए एक बेटी और एक बेटा का क्या मतलब होता है। हजारों नौजवान मेरे बेटे से भी बड़े हैं, इसलिए छोटी सोच के लोग छोटी बात करके जनता को गुमराह करते हैं। क्या लोग अंधे हैं, देख नहीं रहे हैं।”