मेडल जीतने वाली मीराबाई चानू के पास है इतने करोड़ की संपत्ति हैं, ज्यादातर पैसा…

इन दिनों देशभर में टोक्यो ओलंपिक खेलों का डंका बज रहा है. हाल ही में नीरज चोपड़ा ने इन खेलों में भाला फेंक कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया है. वहीँ उनसे पहले टोक्यो गेम्स में भारतीय वेटलिफ्टर सैखोम मीराबाई चानू का नाम काफी वायरल हुआ है. दरअसल, मीराबाई ने इन खेलों में 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता था. उन्होंने ना केवल राष्ट्र्मंडल खेलों में भाग लिया है बल्कि वह विश्व चैंपियनशिप भी खेल कर मेडल अपने नाम कर चुकी हैं. उनके भारत को रजत पदक दिलवाने के बदले सरकार ने भी उन्हें तमाम पुरुस्कारों से सम्मानित किया है. ख़ास तौर पर उन्हें पद्दम श्री दिया जा चूका है. वहीँ इससे पहले साल 2018 में भी मीराबाई अपनी जीत का हल्ला बोल चुकी हैं. उन्हें इसी वर्ष भारतीय सरकार द्वारा मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरुस्कार से नवाज़ा गया था.

आपकी जानकारी के लिए बताते चले कि साल 2014 के राष्ट्रमंडल ग्लासगो में महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग में मीराबाई चानू ने रजत पदक जीता था. इससे पहले उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि साल 2017 में आई थी जब उन्होंने कैलिफोर्निया के अनाहेम में विश्व वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया था. उनके मेडल की बरसात के बाद सरकार भी उन पर तमाम तरह के इनामों की बौछार कर रही है. बता दें कि मीराबाई चानू की कुल संपत्ति लगभग 0.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी 5 करोड़ के करीब है.

पिछले वर्ष उनकी संपत्ति में करीबन 10% वृद्धि देखी गई थी. खबरों की मानें तो उनकी कमाई का अधिकतर हिस्सा उन्हें ब्रांड एडवर्टाइजमेंट और व्यक्तिगत निवेश से आता है. कुल मिलाकर यह क्या लीजिए कि मीराबाई चानू के पास इस समय ऐशों- आराम की किसी भी चीज की कोई कमी नहीं है. खास बात यह है कि टोक्यो में सिल्वर मेडल जीतने के बाद से ही उन पर लगातार पैसों की बारिश की जा रही है.

जहां एक तरफ BYJU’S ने मीराबाई को जीतने के बाद 1 करोड़ रुपए दिए, वहीँ भारतीय सरकार ने 50 लाख नकद इनाम और साथ ही मणिपुर सरकार ने ₹1 करोड़ दिए हैं. इतना ही नहीं बल्कि मणिपुर राज्य पुलिस में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के तौर पर भी उन्हें नियुक्त कर दिया गया है.

मीराबाई की निजी लाइफ की बात करें तो उनका जन्म 8 अगस्त 1994 कौन नोंगपोक काकचिंग में इम्फाल शहर मणिपुर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर रहने वाले मैतई परिवार में हुआ था.

मीराबाई खुद सनमहवाद की फॉलोवर हैं. वह जब 12 साल की थी तभी से उन्होंने अपनी अलग पहचान बना ली थी. इतनी कम उम्र में भी एक बड़ा लकड़ी का बंडल उठाकर वह आसानी से उसे घर ले जा सकती थी हालांकि उनका भाई भी इस बंडल को नहीं उठा पाता था. उसी समय से उन्हें भार उठाने का आभास आ गया था.