4 लोकसभा और 13 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव, यहाँ देखे BJP का हाल

देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के साथ-साथ कई राज्यों में विधानसभा और लोकसभा उपचुनाव भी हुए हैं. पश्चिम बंगाल में हुई हार ने भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा झटका दिया है. लेकिन पश्चिम बंगाल के साथ-साथ कई अन्य राज्यों में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है.

आइए आपको बताते हैं कि देश में हुए उपचुनावों में से कहां-कहां कौन कौन सी पार्टी को जीत नसीब हुई है. मास्की विधानसभा सीट: कर्णाटक में कांग्रेस विधायक प्रतापगौडा पाटिल के बीजेपी में चले जाने के बाद यहां 17 अप्रैल को उपचुनाव हुए. इसमें कांग्रेस के उम्मीदवार बासनागौड़ा तुरविहाल ने बीजेपी के उम्मीदवार प्रतापगौड़ा पाटिल को हरा दिया है.

कन्याकुमारी लोकसभा सीट: यहां पर हुए उपचुनाव में  कांग्रेस के उम्मीदवार विजय कुमार उर्फ विजय वसंत ने बीजेपी के उम्मीदवार राधाकृष्णन पी को हरा दिया है. तिरुपति लोकसभा सीट: यहां से YSR कांग्रेस के सांसद बल्ली दुर्गा प्रसाद राव के सितंबर 2020 में कोरोना से निधन के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुए.

YSR कांग्रेस की उम्मीदवार मद्दीलागुरु मूरति ने तेलुगु देशम के उम्मीदवार पनबाका लक्ष्मी को 271592 वोटों से हरा दिया है.राजस्थान विधानसभा उपचुनाव:  पूर्व कांग्रेस विधायक और सामाजिक न्याय औरअधिकारिता मंत्री भंवरलाल मेघवाल के ब्रेन स्ट्रोक से मृ’त्यु के बाद यहां उपचुनाव हो रहे हैं.

इसमें कांग्रेस के उम्मीदवार मनोज कुमार ने बीजेपी के उम्मीदवार खेमाराम को 35611 वोटों से हरा दिया है. पूर्व कांग्रेस विधायक कैलाश त्रिवेदी के पिछले साल कोरोना से निधन के बाद यहां उपचुनाव हो रहा है. इसमें उनकी पत्नी और कांग्रेस उम्मीदवार गायत्री त्रिवेदी ने बीजेपी के उम्मीदवार डॉ रतनलाल जाट को 42200 वोटों से हरा दिया.

मधुपुर विधानसभा सीट: यहां से झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार हफीजूल हसन ने बीजेपी के उम्मीदवार गंगा नारायण सिंह को 5247 वोटों से हरा दिया है. दमोह विधानसभा सीट: यहां कांग्रेस के उम्मीदवार अजय कुमार टंडन ने बीजेपी के उम्मीदवार राहुल सिंह को हरा दिया है.

जयपुर

प्रदेश में हुए विधानसभा उपचुनाव के नतीजों बेहद रोचक रहे। जहां इन नतीजों ने कांग्रेस को नई मजबूती दी है। वहीं बीजेपी के लिए उपचुनाव का परिणाम फिर मंथन करने वाले बना हैं। जानकारों की मानें, तो वसुंधरा राजे की चुनाव से दूरी भी एक बड़ी वजह है , जिसके चलते बीजेपी इतना बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई।

हालांकि बीजेपी की ओर से राजे की कमी को दूर करने के लिए बीते साल बीजेपी में शामिल हुए ज्योतिरादित्य को गंगापुर सहाड़ा सीट पर प्रचार के लिए उतारा था। लेकिन उसका भी फायदा नहीं मिला। सहाड़ा में भाजपा की सबसे बड़ी हार हुई है। आंकड़ों के मुताबिक यहां 2018 के चुनाव में भाजपा केवल 7280 वोटों से हारी थी। इस बार हार का मार्जिन बढ़कर 42 हजार का हो गया। भाजपा का वोट प्रतिशत भी सहाड़ा में 5 फीसदी घट गया।