11 साल के बच्चे को देख शॉक्ड रह गए युवराज, तीसरी बार जान का खतरा

कैंसर को हराकर क्रिकेट के मैदान में लौटने वाले युवराज सिंह ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वो रियल लाइफ में भी हीरो है. युवराज सिंह ने 10 साल से कैंसर से लड़ रहे अपने 11 साल के नन्हें फैंस से न केवल मुलाकात की, बल्कि माता-पिता का दर्द समझते हुए उनका हौंसला बढ़ाया. युवराज के इस फैन का बोन मेरो ट्रांसप्लांट होना और अगले छह महीने तक वह अस्पताल में भर्ती रहेगा.

युवराज को बेहद चाहने वाला यह मासूम इंदौर का 11 साल का रॉकी है. रॉकी ने गुुरुवार शाम को इंदौर के होलकर स्टेडियम पर अपने माता-पिता और बहन के साथ युवराज सिंह से मुलाकात की. इस दौरान रॉकी को देखकर युवराज सिंह कुछ देर बोल ही नहीं पाए.

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद रॉकी का हौंसला देखकर युवराज भी उसके फैन हो गए. युवराज ने टी-शर्ट, स्कूल बैग और कैप गिफ्ट की. साथ ही युवराज सिंह ने रॉकी के माता-पिता से कहा कि बच्चे के सामने घबराना नहीं. उन्होंने कहा कि मेरी तरह रॉकी भी कैंसर से जीतेगा.

तीसरी बार जान पर खतरा
रॉकी की जिंदगी पर तीसरी बार कैंसर का खतरा मंडरा रहा है. रॉकी को सबसे पहले एक साल की उम्र में कैंसर का पता चला था. इलाज के बाद ढाई साल की उम्र में रॉकी ठीक हो गया था. बाद में उसे एक बार और इस बीमारी ने जकड़ा था. अब बोन मेरो ट्रांसप्लांट ही अंतिम विकल्प है.

आज अस्पताल में भर्ती होगा रॉकी
रॉकी को बोन मेरो ट्रांसप्लांट के लिए शुक्रवार को इंदौर के एक निजी अस्पताल में भर्ती किया जाएगा. पिता निशांत दुबे खुद बेटे को बोन मेरो देंगे. इलाज के लिए अब रॉकी को अगले छह महीने तक अस्पताल में भर्ती रहना होगा.

युवराज के छह छक्के ने बनाया दीवाना
रॉकी भी युवराज की तरह क्रिकेट खेलना चाहता है. युवराज ने छह सिक्सर ने उसे उनका फैन बना दिया. हालांकि, बीमारी की वजह से वह आम बच्चों की तरह क्रिकेट नहीं खेल पाता है.

युवी ने जीत कैंसर से जंग
जब युवराज को पता चला कि उन्हें कैंसर है तो बाकि लोगों की तरह उनके दिल में पहला खयाल यह नहीं था कि वह जिंदा रह पाएंगे या नहीं, उन्हें तो सिर्फ इस बात का डर था कि क्या वह दोबारा क्रिकेट खेल पाएंगे? क्रिकेट के प्रति उनका यह जूनून ही तो है जिसकी वजह से वह अब तक उन्होंने हार नहीं मानी है.

कैंसर के नाम से ही जहां लोग कांपने लगते हैं, वहीं इस खिलाड़ी ने बीमारी से लड़कर मैदान पर वापसी की और साबित किया क्रिकेट उनके लिए सिर्फ एक खेल नहीं है.

‘भगवान वर्ल्ड कप दे दे’
वर्ल्ड कप 2011 में उनका शरीर कैंसर की वजह से उनकी साथ नहीं दे पा रहा था. युवराज सिंह ने अपनी ऑटोबायोग्राफी टेस्ट ऑफ माय लाइफ में लिखा है, ‘उस पूरे टूर्नामेंट मुझे उल्टियां हो रही थी, सांस में लेने में दिक्कत हो रही थी. मुझे वर्ल्ड कप के आगे कुछ नहीं दिख रहा था. मुझे नींद नहीं आती थी और इस कारण मुझे कई बार नींद की गोलियां भी दी जाती थी ताकि मैं मैच के लिए तरोताजा रहूं. मेरे लिए जीत बहुत ज्यादा जरूरी थी. मैंने अपने स्टाफ मेंबर से फाइनल मैच से एक रात पहले कहा था कि भगवान चाहे तो मेरी जान ले ले लेकिन हमें वर्ल्ड कप दे दे’.